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Surya Rao Bomidi

Others

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Surya Rao Bomidi

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चलते चलते

चलते चलते

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ख्वाहिशों से डर कर यूँ चलते चलते एक मोड़ पर

जिंदगी को गुमसुम सा तड़पते पाया है


वक्त पास खड़ा, जिंदगी को समझा रहा था

दर्द को कभी सिसकियाँ, तो कभी आंसू बन कर

आँखों से बहते पाया है


सहम सी गई है जिंदगी, कभी अपनों ने,

कभी किस्मत ने तो कभी वक्त ने थकाया है


ए दुनिया के रखवाले क्या है तेरी मर्जी बता

क्या तूने हमें पैदा कर इस हालत में


हमें अपनी औकात दिखा कर

अपनी ताकत का एहसास कराया है।



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