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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

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Vijay Kumar parashar "साखी"

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एक बच्चा होना

एक बच्चा होना

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एक बच्चा होना भी नही होता सरल है

ज़माने में कितना अधिक भरा गरल है

अपनी असलियत को बरकरार रखना,

वो भी ज़माने में जो भयंकर जंगल है


जहां पे खतरनाक जानवर घूमते है,

वो इंसानों के वेश में करते दंगल है

एक बच्चा होना भी नही होता सरल है

बच्चा होना,अपनी मासूमियत ढोना,


आज दिखता न ऐसा कोई निश्छल है 

जो रखते भीतर बालपन का दलदल है

वो ही बनते पापी दुनिया मे कमल है

एक बच्चा होना भी नहीं होता सरल है।


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