एक औरत : रूप अनेक
एक औरत : रूप अनेक
तू मन मोहिनी तू कामिनी तू शक्ति स्वरूपा
तू चंचला तू अल्हड़ तू शांति स्वरूपा
तू ममतामयी तू सहनशीला तू अपराजिता
तू ही नव जीवन देती तू ही घरौंदे संवारती
तू आज की नारी तू कर्म योगिनी तू खुद ही राह बनाती
तू कदम-कदम से मिला
तू ही पुरुषों की आन बान शान है बन जाती
तू सरल सहज सौम्य
तू ही बुलंद हौसले की रानी लक्ष्मीबाई है बन जाती
तुझमें ही दुर्गा तुझमें ही काली तुझमें ही मां वीना वादिनी
तेरे हर रुप को शत शत नमन
तू ही सृष्टि को गौरवान्वित है करती!!!
