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ritesh deo

Abstract

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ritesh deo

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ए नजर ❤️

ए नजर ❤️

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जो नजर चाहे, नजर ,कौन देखता है

सब अगर चाहे, मगर, कौन देखता है


देखना खुद को, नजर खुद पे नही तेरी,

पिला तू जाम या जहर, कौन देखता है


नजर करिश्मा ए चाहत नजर मंजिल है

नजर आदत है,अगर , कौन देखता है


एक मैं नजर तेरी नजरो में नजर आऊ तो,

पर फिर ए नजर ये मेरा घर कौन देखता है


मुश्किल में नजर से नजर आई एक रोज,

छोड़कर के बिस्तर ये शहर कौन देखता है


मेरे नाम से आई थी चिट्ठी वो नज़र में है न,

ये ,मेरी आंखो, में वो असर कौन देखता है


मेरा लिखना ए नजर तुझपे नजर आए तो,

नजर ए इश्क पर, ये खबर कौन देखता है


पंक्तियां सब कहती है, अहसास करने वाले अगर हो !


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