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सुरशक्ति गुप्ता

Abstract

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सुरशक्ति गुप्ता

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ए चांद

ए चांद

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रूबरू हूं तुझसे 

तेरे ख्यालों से,

बता नहीं सकता

अपने दिल के अरमानों को 

तजुर्बे अदब हैं तेरे 

दीदार- ए-ख्वाब का

तू अश्क बन

मेरी निगाहों का

ए चांद तुझे छूने की तमन्ना है........।


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