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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

दूर तलक जाना है

दूर तलक जाना है

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हमें बहुत दूर तलक जाना है

हमें आसमान को झुकाना है

अभी तो चलना शुरू किया है,

हमें तो सितारों तक जाना है


अभी मंज़िल का पैर मिला है,

हमें तो इसके सर तक जाना है

हमें बहुत दूर तलक जाना है

मानाकि सच का रास्ता कठिन है


क्या सच बिना जीना मुमकिन है

सत्य से ही विजय को पाना है

सत्य से ही भीतर के अंधेरे को,

तुझे साखी धुंधुंकर जलाना है


अपनी रूह के दीपक को तुम्हें,

हर रोज हरपल ही जलाना है

हमें बहुत दूर तलक जाना है

ज़माने को बाहुबल से नहीं,


अपने स्वभाव से झुकाना है

शेर वो नही जो ताकतवर है,

शेर वो है जिसका दिल में घर है,

हमें अपने अच्छे कर्मो से,


सूखे पर नाव को तैराना है

हमें बहुत दूर तलक जाना है।


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