STORYMIRROR

Pranjali Kalbende

Tragedy

3  

Pranjali Kalbende

Tragedy

दर्द

दर्द

1 min
175


बेवफाई का दर्द है

खंजर सा चले

आह बस निकली है

दिन रात छले....


धुँआ धुँआ बना देखो

आँरजू तडपती है

बरसा है गम ऐसे

आँसुओ की बाढ है.....


गया तू जो छोड के यूं

दुनिया विरान है

पतझड का मौसम जैसे

उम्मीदें बेहाल है.....


मन्नते थीं कई सारी

दुँवाऐ नाकाम है

बिछड गया जो ऐसे

मेरा क्या कसूर है....



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy