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मधुशिल्पी Shilpi Saxena

Abstract Tragedy

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मधुशिल्पी Shilpi Saxena

Abstract Tragedy

दर्द

दर्द

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क्यूँ धुँध मे ये ज़िंदगी खो रही है!

उजालों के बावजूद तिमिर मे खो रही है!!


है खुशियों का मेला फिर भी दिल अकेला!

चाँद की बाहों मे क्यों चाँदनी रो रही है!!

   


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