STORYMIRROR

Kumar Vikash

Inspirational Thriller

4  

Kumar Vikash

Inspirational Thriller

दिल सोचने लगा

दिल सोचने लगा

1 min
250

इश्क की गलियों से गुजर चुका मैं

गुजरे हुये पलों को बिसर चुका मैं।


वो नजरों का मिलना दिलों का मचलना

जानें कितने ही बार फिसल चुका मैं।


अब क्यों मिले तुम मुझे मेरे इस हाल में

जब दिल सोचने लगा की मर चुका मैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational