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Chandni Bhatnagar

Classics

4  

Chandni Bhatnagar

Classics

dil se dil tak

dil se dil tak

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ना जाने ये कैसा एहसास हुआ है 

दिल से रूह तक बेहाल हुआ है 


ढूंढा जिसे दर दर मैंने 

वो आज मेरे रूबरू हुआ है

 

कपटी ढोंगी नहीं सन्यासी मुझे नाम दिया है 

शान्ति और धैर्य से प्यार हुआ है 


कांच की तरह ये दिल चकनाचूर हुआ है 

ना जाने ये कैसा एहसास हुआ है 


दिल से रूह तक बेहाल हुआ है 

नाता तेरा मेरा ना जाने कब से है 


ये प्यार नहीं ये मोहब्बत का जूनून बोल उठा है 

मिल कर तुझे ये सब बताना है

 

कपटी ढोंगी नहीं सन्यासी मुझे नाम दिया है 

ना जाने ये कैसा एहसास हुआ है 

दिल से रूह तक बेहाल हुआ है। 


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