STORYMIRROR

Chandni Bhatnagar

Abstract

4  

Chandni Bhatnagar

Abstract

गुस्ताखी को क्या नाम दूँ

गुस्ताखी को क्या नाम दूँ

1 min
211

तेरी इस गुस्ताखी को क्या नाम दूं

 तेरी इस गुस्ताखी को क्या नाम दूं


 तुझे वफ़ा की मूरत या मुझे

 धोखेबाज़ का खिताब मिला


 तुझसे मोहब्बत करने का ये सिला मिलेगा

 मुझे पता न था


 एक दिन इन चार दीवारों से इस

 तरह मोहब्बत हो जाएगी कभी सोचा न था।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract