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ARVIND KUMAR SINGH

Abstract

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ARVIND KUMAR SINGH

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दिल की सुन्दरता

दिल की सुन्दरता

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जो हमने तुमको पूजा

तो तुम खुदा बन गये

रास्ते थोड़ा और चले

तो गुरूर से तन गये 


रवैया नहीं है बेहतर

इसको बदलना होगा

बेवफा कहलाने से

पहले सम्हलना होगा


हुजूर किसी को कभी

न घमंड में परखना

आशमान की बजाय

पांव जमीन ही रखना


रोक सको बिसात नहीं

हर हाल टूट के रहेगा

फिर घमंड किसी का 

भी कोई क्योंकर सहेगा 


सुन्दरता केवल दिल

की है तो अमर रहेगी

मरने के बाद भी उसी

की ही कहानी कहेगी!


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