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AVINASH KUMAR

Abstract

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AVINASH KUMAR

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दिल की बात

दिल की बात

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दिल की बात न पूछे कोई, 

क्या क्या दिल में होता है? 

पल पल बदले रंग हजारों, 

हँसता है कभी रोता है। 


यह तो है मतवाला राही, 

जाने कब किस पर आ जाए, 

कठिन बहुत है इसे समझना, 

इसने लाखों भेद छुपाए। 

पाता है अपनो के लिए तो, 

खुद के लिए वो खोता है। 


दिल की कोई जात न भाषा, 

कहीं पे ईश्वर कहीं पैगम्बर। 

गहराई में जैसे सागर, 

विस्तृत मै है वैसे अम्बर। 

नफरत की ये मरूभूमि पर, 

बीज प्यार के बोता है। 


कलियों से ज्यादा कोमल है, 

घायल हो जाए बातों से। 

शीशे जैसा नाजुक है दिल, 

टूटे ये जाए घातों से। 

फूलों के मानिंद खुशी से, 

ये काँटो पर सोता है|


कभी किसी से अपने मन की, 

कोई बात न कह पाए। 

औरों की खुशियों की खातिर, 

दर्द भी हँस कर सह जाए। 

क्या देता यह जीवन जिसको, 

सारी उमर ये ढोता है।


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