yogesh verma
Tragedy
दुनिया को हँसाता हूँ बूंँदों को छुपा के
दिल को समझाता हूँ उंगलियों को दबा के
जब बैठे सामने ढूढ़े आंखों में नमी वो
जिनकी सर्दियां थी गुजरी मेरे आंसुओ को जला के।
चिट्ठियों की ...
जलता आंसू
kaash
रेत
कैसे हुआ
दिखावा
चटका कांच
जहाँ भगवान् भी मन्दिर, मस्जिद, गुरूद्वारा हो गया। जहाँ भगवान् भी मन्दिर, मस्जिद, गुरूद्वारा हो गया।
नाप लूं एक पल में दुनिया सारी, पहुंच जाऊंगी मैं पल-भर में। नाप लूं एक पल में दुनिया सारी, पहुंच जाऊंगी मैं पल-भर में।
भोला-सा वो बचपन, पता नहीं कहां खो गया। भोला-सा वो बचपन, पता नहीं कहां खो गया।
एक प्यारा फूल सुरभित आ गया जब हाथ में एक प्यारा फूल सुरभित आ गया जब हाथ में
कभी नहीं ये राधा नाची कभी न नौ मन तेल रहा। अम्मा तुम तो चली गयी पर लाल तुम्हारा झेल रह कभी नहीं ये राधा नाची कभी न नौ मन तेल रहा। अम्मा तुम तो चली गयी पर लाल तुम्हा...
ए फ़ुरसत तू आ कभी मेरे पास ना दूर करें तुझे रखें आस पास। ए फ़ुरसत तू आ कभी मेरे पास ना दूर करें तुझे रखें आस पास।
भागता था चांद को छूने की चाह में दिन रात गुज़रे धन पाने की चाह में भागता था चांद को छूने की चाह में दिन रात गुज़रे धन पाने की चाह में
हो रहा था पर्यावरण पर अत्याचार, पशु-पक्षी थे लाचार।। हो रहा था पर्यावरण पर अत्याचार, पशु-पक्षी थे लाचार।।
आए दिन धमाके होते रहते हैं, जिनके बच्चे बाहर हों, वो माँ-बाप कहाँ चैन से सोते हैं? आए दिन धमाके होते रहते हैं, जिनके बच्चे बाहर हों, वो माँ-बाप कहाँ चैन से स...
बातें याद आती हैं, यादें बहुत सताती हैं। बातें याद आती हैं, यादें बहुत सताती हैं।
ख्वाहिशों के रथों पे वो बैठे हुए, मन के घोड़ों को दौड़ा रहे हैं। ख्वाहिशों के रथों पे वो बैठे हुए, मन के घोड़ों को दौड़ा रहे हैं।
दुनियां से अपना वजूद भी हमेशा के लिए मिटा जाओगे। दुनियां से अपना वजूद भी हमेशा के लिए मिटा जाओगे।
एक हाथ से काला धन लेते फिर मुख से करते धर्म-कर्म की बात।। एक हाथ से काला धन लेते फिर मुख से करते धर्म-कर्म की बात।।
शिक्षा जब से व्यापार हुई , शिक्षक की हालत पस्त हुई। शिक्षा जब से व्यापार हुई , शिक्षक की हालत पस्त हुई।
दो पल मुझे भी जी लेने दो............. अरदास पंछियों की......... दो पल मुझे भी जी लेने दो............. अरदास पंछियों की.........
वो मेरी जिंदगी के सबसे खूबसूरत पल बन गए. वो मेरी जिंदगी के सबसे खूबसूरत पल बन गए.
निष्ठूर नियति के राग पुराने दुःख बैठे हैं लिए बहाने। निष्ठूर नियति के राग पुराने दुःख बैठे हैं लिए बहाने।
ना हम कभी सुधरेंगे ना ही कुछ सोचेंगे बस यूँही लड़ते रहेंगे पागलो की तरह। ना हम कभी सुधरेंगे ना ही कुछ सोचेंगे बस यूँही लड़ते रहेंगे पागलो की तरह।
तुम्हारे पास ले मुझको दिखायें जा रही हैं फिर। तुम्हारे पास ले मुझको दिखायें जा रही हैं फिर।
अब पहाड़ो में लोग नहीं रहते मकान तो है पर घर नहीं बसते। अब पहाड़ो में लोग नहीं रहते मकान तो है पर घर नहीं बसते।