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Arunima Bahadur

Inspirational

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Arunima Bahadur

Inspirational

दीवाली कुछ ऐसी

दीवाली कुछ ऐसी

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एक कदम रोको तो जरा,

अंतस की खिड़की खोलो तो जरा,

देखो जरा कितनी दीवाली,

आज सूनी सूनी सी हैं,

कही न थाली में भोजन है,

कही न उजियारे की एक किरण है,

बहुत सजाए आपने घर अपने,

थालियां भी भर ली पकवानों से,

पर कितनी थालिया,

इंतज़ार कर रही हैं,

सूनी आंखों से,

क्षुधा पेट की मिटाने को,

कही अंधकार हैं,

दीपक को इंतज़ार हैं,

उजियारा लाने का,

बरसो से तरसती गरीबी,

महंगाई की मार तले,

तोड़ रही है कही सांसे,

न नूतन वस्त्र,न पकवान,

न कोई खुशिया,

क्या उतरना नही चाहिए,

हमे धरातल पर,

उन अनगिनत की खुशिया सजाने,

कुछ अपनी थाली न निवाले,

मिटा दे कुछ के क्षुधा के प्याले,

भर जाए हर झोली,

खुशियो से,

फिर चले एक कदम,

हर झोली खुशियो से भरने,

मिटाने हर भेदभाव,

जगाने खुशियो के सद्भाव,

आइए मनाए ऐसी दीवाली,

भरी हो जहाँ हर झोली खाली,

दे कर तो देखे,

एक निस्वार्थ प्रेम से भरी खुशियां,

आज से और अभी से।


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