Krishna Khatri
Abstract
प्रज्वलित कर लो
दीप मन का
हो जाएगा रोशन
सारा जहां
लौ से लौ मिलाकर
चलो तुम
हो जाएगी तुम्हारी
आसान डगर
तब आएगी नज़र
सामने मंजिल भी
अपने आप
चमक उठेगा हर चेहरा
दुबक जाएगा तम सारा
उजला हो जाएगा परिवेश !
यही इल्तिजा ह...
जब तक मीठा न ...
फितरत !
जी भर के जी ल...
जी लेंगे हम द...
आंखों ने देखा...
खलिश !
अश्रु मेरे .....
मां तुम अमृता...
पायल की झनक हूं, मेकअप के लिस्ट की, मैं चेहरे की रौनक हूं। पायल की झनक हूं, मेकअप के लिस्ट की, मैं चेहरे की रौनक हूं।
भुला कर सौ गलतियाँ सनम की फिर से गले लगाओगे। भुला कर सौ गलतियाँ सनम की फिर से गले लगाओगे।
बस अंकों का तो फेर है इक्कीस आने में न देर है उजाले की है दस्तक अब छंटने वाला अंधेर बस अंकों का तो फेर है इक्कीस आने में न देर है उजाले की है दस्तक अब छंटन...
जिन खुशियों की तलाश में कीमती वक्त बिता दिया था, उन खुशियों को तो मैंने खामोशियों में जिन खुशियों की तलाश में कीमती वक्त बिता दिया था, उन खुशियों को तो मैंने खामोश...
लिखा था खत मैंने इंसानियत के पते पर, वो डाकिया ही मर गया पता खोजते - खोजते। लिखा था खत मैंने इंसानियत के पते पर, वो डाकिया ही मर गया पता खोजते - खोजते।
'साहिल' न लग सके सागर की कश्तियाँ इसलिए तूफान भी बुला रहा है वो। 'साहिल' न लग सके सागर की कश्तियाँ इसलिए तूफान भी बुला रहा है वो।
आज इश्क़ सरे आम बदनाम होगा चैन दिल का जब भी नीलाम होगा। आज इश्क़ सरे आम बदनाम होगा चैन दिल का जब भी नीलाम होगा।
जिंदगी के कुछ कड़वी सच्चाइयों का कर सामना, अपनी आदतों में कर बदलाव इसे बसाना होगा। जिंदगी के कुछ कड़वी सच्चाइयों का कर सामना, अपनी आदतों में कर बदलाव इसे बसाना...
एक रंग - बिरंगी पतंग एक नया सा समां बांध रही है! एक रंग - बिरंगी पतंग एक नया सा समां बांध रही है!
हम जानते है मिथ्या तेरी चतुराई, अब न लौटेगी सत्ता तेरी प्रभुताई। हम जानते है मिथ्या तेरी चतुराई, अब न लौटेगी सत्ता तेरी प्रभुताई।
जो अच्छे कर्म करता वो मर कर भी जीवित रहता है। जो अच्छे कर्म करता वो मर कर भी जीवित रहता है।
चलते चलते पांव का कांटा निकल गया। चलते चलते पांव का कांटा निकल गया।
आप बोल रहे हो, निर्मल जल भी बोलता पर कोई है जो, अनकहे सिर्फ सुनता है । आप बोल रहे हो, निर्मल जल भी बोलता पर कोई है जो, अनकहे सिर्फ सुनता है ।
उदासी छाने लगती है तो क्या है किसी का भीग जाना ही अलामत है बरसने की ! उदासी छाने लगती है तो क्या है किसी का भीग जाना ही अलामत है बरसने की !
ए आकाश तेरा छोर कहां है, जीवन का वो मोड़ कहां है! ए आकाश तेरा छोर कहां है, जीवन का वो मोड़ कहां है!
कलम, बंदूक और हल के सिपाहियों का सदा ही जय जय कार हैं। कलम, बंदूक और हल के सिपाहियों का सदा ही जय जय कार हैं।
लेगा चरणों की सुधि केवट तब ही पार ले जाए।। लेगा चरणों की सुधि केवट तब ही पार ले जाए।।
किसी से कुछ मिले ना मिलें तमन्ना यही है, हम नाम अमर कर जाए जग में अपना..। किसी से कुछ मिले ना मिलें तमन्ना यही है, हम नाम अमर कर जाए जग में अपना..।
ये जलाता है फिर लजाता है क्योंकि तुम सुनहरी धूप से जन्मीं हुई सोना हों। ये जलाता है फिर लजाता है क्योंकि तुम सुनहरी धूप से जन्मीं हुई सोना हों।
बस इन्हीं बातों का तो जिक्र है। इन्हीं बातों की ही फिक्र है। बस इन्हीं बातों का तो जिक्र है। इन्हीं बातों की ही फिक्र है।