दीनदयाल राम
दीनदयाल राम
जय रघुनंदन, दीनदयाल, करुणा के सागर राम,
सीता संग विराजित सुंदर, जग के पालनहार राम।
वन-वन भटके धर्म बचाने, त्याग-तपस्या धाम,
जय-जय श्रीराम कहत जग सारा, मिटत सकल अभिराम।।
भक्तों के हित सदा खड़े तुम, संकट हरनहारे,
दीन-अनाथन के हो रखवारे, प्रेम सुधा बरसावनहारे।
अयोध्या के उजियारे दीपक, मर्यादा के तारे,
राम नाम जपते ही मन के, कट जावंय अंधियारे।।
धनुष उठाए अधर्म मिटाए, रावण दल संहारे,
सत्य-धर्म के पथ दिखलाए, जीवन के उजियारे।
शरण पड़े जो चरण तुम्हारे, पावंय सुख अपारे,
जय श्रीराम गूंजे हर दिशा, मंगल गान तुम्हारे।।
मंदिर-मंदिर दीप जले जब, नाम तुम्हारा गावें,
मन मंदिर मं बसवव संगी, प्रेम सुधा बरसावें।
राम बिना सब सूना लागे, जग मं सुख कहां पावें,
जय रघुनंदन, दीनदयाल, सबके संकट हरि जावें।।
