ध्वंसावशेष
ध्वंसावशेष
खंडहर ही बताते हैं,
इमारत बुलंद थी,
सो ध्वंसावशेष जरूरी है,
ध्वंसावशेष रोजगार है,
अनेकों भूखे पेटों का उपचार है,
जो आया, वो जाएगा,
पहाड़ ढह जाएगा,
नदी सूख जाएगी,
आज जो सत्तर, अस्सी मंजिला इमारतें है,
कल नजर नही आएंगी,
वृक्ष से लेकर मानव,
जानवर तक , लुप्तप्राय प्रजाति हैं,
अवशेष रह जाते हैं,
ट्विन टॉवर ढ़ह गया,
बद्रीनाथ बह गया,
डायनासोर से लेकर
जाने कितनी चीजें लुप्त हुई,
सभ्यता भी----
पर क्या कहिये मानव मस्तिष्क का,
बला का खोजी है,
भोजपत्र से लेकर अनेक लिपियों तक,
मोहनजोदाड़ो से लेकर ,
हड़प्पन काल तक,
ध्वंसावशेषों के बूते,
इतिहास खोद लाता है,
नए-नए उपकरण,
नई-नई तकनीकें,
इन खोजी आंखों से,
कुछ नही बच पाता है,
इंसानी गलतियां हो,
या शैतानी करतूत,
प्राकृतिक आपदा या विलुप्त संपदा,
ध्वंसावशेष वैज्ञानिकों की,
मदद कर जाते हैं,
भूल सुधार की नई, नई तकनीक,
सौंप जाते हैं---, सो,
न हों निराश,
नए ट्विन टॉवर बनते हैं,
नई सभ्यताएं पनपेगी,
नए, जंगल, नई नदियां,
अपने परिष्कृत रूप में,
सामने आएंगे,
विनाश पर विकास की जीत का,
ठप्पा लगा जाएंगे.
