STORYMIRROR

नासा ( NaSa ) येवतीकर

Romance

3  

नासा ( NaSa ) येवतीकर

Romance

धूप

धूप

1 min
171

बाहर तेज धूप है रानी निकला ना कीजिये

गोरा है तेरा मुखड़ा कही काला ना हो जाए


नाजुक सा तेरा बदन नाजुक सी तेरी चाल

तुझे देखने वाले सब हो जाते है हाल बेहाल

संभल के चल कहीं पांव फिसल ना जाए


तेरे आने रास्ते पे सब आंख बिछाये बैठते है

तू ना दिखे एक पल तो गम के आंसू रोते है

मुखड़े पे पर्दा रख कहीं नजर न लग जाए


तू चीज ऐसी है तुझे देखने सब मरते है

तू ना मिली एक दिन तो जीने से डरते है

रब से मांगे दुआ तुझे लंबी उमर मिल जाए



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance