Sandeep Sharma
Romance
धुआं-धुआं सी हो गई है जिंदगी,
आँखों में जलन, दिल में चुभन,
जुबां लड़खड़ाने लगी है हमदम,
न जाने किस मुकाम पे आ गई है जिंंदगी।
वयं रक्षाम् व...
दीप
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परिश्रम
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सरस्वती मंदिर
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प्रेम
चिराग ए दिल में जलाओगे तो प्रेम बरसेगा दिल में निश्चित ही प्यार का उदय होगा ! चिराग ए दिल में जलाओगे तो प्रेम बरसेगा दिल में निश्चित ही प्यार का उदय होगा ...
वो बनकर रूह इस दिल के बहुत नज़दीक रहती है। वो बनकर रूह इस दिल के बहुत नज़दीक रहती है।
करते हैं सवाल किस्से वो सारे, कभी जिनमें तुम रहा करती थी! करते हैं सवाल किस्से वो सारे, कभी जिनमें तुम रहा करती थी!
एतराज़ कहाँ तेरे रूठने पे तुम रोज़ रूठो मैं मनाया करूँ। एतराज़ कहाँ तेरे रूठने पे तुम रोज़ रूठो मैं मनाया करूँ।
आशा और उम्मीदों के धागों को जोड़ों कोशिशों से जब तक है सांसें बुलंद रखो इरादे। आशा और उम्मीदों के धागों को जोड़ों कोशिशों से जब तक है सांसें बुलंद र...
एक ही साँस की ये सारी कसमकस जिंदगी की लो थोड़ी साँसें तुम हमारी उधार ही रख्खो। एक ही साँस की ये सारी कसमकस जिंदगी की लो थोड़ी साँसें तुम हमारी उधार ही रख्खो।
ये सब खेल वक़्त रचाता है इंसान तो सिर्फ किरदार निभाता है। ये सब खेल वक़्त रचाता है इंसान तो सिर्फ किरदार निभाता है।
तेरे जैसा सारा जग हो अपना ये अरमान जुदा है ! तेरे जैसा सारा जग हो अपना ये अरमान जुदा है !
बस लहरें आने तक साथ हूं ना थाम सकोगे तुम मुझको मैं तो फिसलती रेत हूं। बस लहरें आने तक साथ हूं ना थाम सकोगे तुम मुझको मैं तो फिसलती रेत हूं।
गुनाह कर भी लेता तो गुनाहगार नहीं होता इश्क़ मे होकर शायद वफ़ादार नहीं होता। गुनाह कर भी लेता तो गुनाहगार नहीं होता इश्क़ मे होकर शायद वफ़ादार नहीं होता।
यह इश्क बड़ा अनमोल हम मोल लगा बैठे तराजू लेकर बैठ गए यह इश्क बड़ा अनमोल हम मोल लगा बैठे तराजू ले...
हम अपने कमरे में, जिन्दगी का यह सफर, इसी तरह कट रहा है। हम अपने कमरे में, जिन्दगी का यह सफर, इसी तरह कट रहा है।
बेबाक से घूमो फिरो उड़ो आसमान में पंख फैलाओ नील गगन में। बेबाक से घूमो फिरो उड़ो आसमान में पंख फैलाओ नील गगन में।
यूँ लगता तुम यहीं कहीं हो पाने की चाहत जागी है। यूँ लगता तुम यहीं कहीं हो पाने की चाहत जागी है।
जीतते तो सिर्फ तुम और चुने हार हम फिर ये कैसे प्यार हम ? जीतते तो सिर्फ तुम और चुने हार हम फिर ये कैसे प्यार हम ?
राधा और मीरा बसे हैं ऐसे, मानो एक श्वास तो दूजा प्राण ! राधा और मीरा बसे हैं ऐसे, मानो एक श्वास तो दूजा प्राण !
माना की मेरी शक्ल आपको नापसन्द है पर इस दिल का क्या जो आप पर मर मिटा है। माना की मेरी शक्ल आपको नापसन्द है पर इस दिल का क्या जो आप पर मर मिटा है।
भूल गया मानव अपनी नैसर्गिक प्रवृत्ति हो गया क्या उसकी आत्मा का हनन ! भूल गया मानव अपनी नैसर्गिक प्रवृत्ति हो गया क्या उसकी आत्मा का हनन !
कामयाबी चूमे तेरे कदम खुशहाल रहे तू हर दम। कामयाबी चूमे तेरे कदम खुशहाल रहे तू हर दम।
मैं कड़वा काडा का घूंट था वो समझदार सी बंदी थी मैं खडूस सा बंदा था। मैं कड़वा काडा का घूंट था वो समझदार सी बंदी थी मैं खडूस सा बंदा था।