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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Inspirational

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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Inspirational

धन्य हुए पाकर के यह उपहार

धन्य हुए पाकर के यह उपहार

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सदा प्रभु तूने किया है उपकार,

धन्य हुए पाकर के यह उपहार।


हो गया पूरा था जिसका इंतजार,

आ गई है बगिया में नूतन बहार।

हो गया है सुखमय अपना संसार,

आजीवन रहूंगा मैं तेरा कर्जदार।

करुणा करना मेरे प्रभु जी अपार,

संसार सागर से कर दें उद्धार।

सदा प्रभु तूने किया है उपकार,

धन्य हुए पाकर के यह उपहार।


यह कली इस चमन में ज्यों ही आई,

सारी ही सारी दुनिया मेरी मुस्कुराई।

शब्द मिलते ही नहीं करूं जो बड़ाई,

वर्णनातीत प्रभु हैं अगणित भलाई।

तेरी माया तो मेरी समझ में न आई,

प्रभुजी तेरी लीला तो है अपरंपार।

सदा प्रभु तूने किया है उपकार,

धन्य हुए पाकर के यह उपहार।


कृपा रखिए सदा प्रभु यह बनाए,

परहित में जीवन मेरा काम आए।

भावना भक्ति की भटकने न पाए,

दर्प मन में जनम भी ले न पाए।

तव गुणों का गायन मन को भाए,

यही वरदान दीजै प्रभु बन उदार।

सदा प्रभु तूने किया है उपकार,

धन्य हुए पाकर के यह उपहार।



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