धड़कन
धड़कन
जब तक दिल धड़कता है,
तब तक जीवन चलता है,
कभी कभी किसी के चाह में,
कभी कभी किसी के डाह में।
धड़कन तो चलता ही रहता है,
धड़कन ये कहता ही रहता है,
जी ले जिंदगी अपनी मर्जी से,
जब तक चल रहा मैं सिद्दत से।
जिंदगी का कारवां है मुझसे,
इतना गुमान ना रख खुद से,
जब तक मैं हूँ धड़कता हुआ,
कर ले कुछ काम फड़कता हुआ।
