Dr.Rashmi Khare"neer"
Drama
अविचल अविरल बहती जाऊं
अनजाने थपेड़े सहती जाऊं
कितने राज छुपाती जाऊं
हर प्रलय को देखती जाऊ
तेरे आंसू को बहते देखूं
तेरी हंसी में हंसू
तुझे अपने में समेटे हुए बहती जाऊं।
ना कोई कहीं
मजबुर
जिंदगी ना मिल...
हर रूप में ना...
वैधव्य
नारी हूं गर्व...
विरह वेदना
होली की प्रीत
आज मेरा देश
अनेकता में एक...
जूम, मीट, टीम, स्काइप बढ़िया मिलो सबसे तो जिंदगी है सेट हर। जूम, मीट, टीम, स्काइप बढ़िया मिलो सबसे तो जिंदगी है सेट हर।
बस दे दो एक टुकड़ा बादल का मुझे, तुम रख लो पूरा आसमान। बस दे दो एक टुकड़ा बादल का मुझे, तुम रख लो पूरा आसमान।
खुले नीलाम्बर की चादर,रंग-बिरंगे रंगों की दुनिया के प्रेमपाश में कैद हो गयी दुनिया सारी खुले नीलाम्बर की चादर,रंग-बिरंगे रंगों की दुनिया के प्रेमपाश में कैद हो गयी दुनि...
अब न कंधे पर मित्र हाथ तेरा बिछड़ गया है, प्रिय दोस्त मेरा अब न कंधे पर मित्र हाथ तेरा बिछड़ गया है, प्रिय दोस्त मेरा
जिनमें होता, कुछ करने का जिगर वो दरिया से ढूंढ लाते मोती, सुंदर जिनमें होता, कुछ करने का जिगर वो दरिया से ढूंढ लाते मोती, सुंदर
लक्ष्मण बने है शेषनाग जी स्वयं विष्णु ही नर रूप में आया।। लक्ष्मण बने है शेषनाग जी स्वयं विष्णु ही नर रूप में आया।।
तुझे नहीं पता पर, ये ज़िन्दगी टिकी ही है तुझ पर...! तुझे नहीं पता पर, ये ज़िन्दगी टिकी ही है तुझ पर...!
फिर भी हम बो रहे बबूल रूपी जहरीले जनसंख्या वन फिर भी हम बो रहे बबूल रूपी जहरीले जनसंख्या वन
असुरी शक्तियों को, जगा चुका है, तामसिक वृति का हो चुका है इंसान, असुरी शक्तियों को, जगा चुका है, तामसिक वृति का हो चुका है इंसान,
मैं, माँ की चटाई बिछाकर माँ का चश्मा लगाती हूँ और माँ की किताबों में खोजती हूँ माँँ...! मैं, माँ की चटाई बिछाकर माँ का चश्मा लगाती हूँ और माँ की किताबों में खोजती हू...
किताब के पन्नों की तरह पलट जाए ज़िन्दगी तो क्या बात है ! किताब के पन्नों की तरह पलट जाए ज़िन्दगी तो क्या बात है !
थेथर की तरह पसरी रहती हूँ अक्सर। थेथर की तरह पसरी रहती हूँ अक्सर।
मेरी गुड़िया कानी हो गई मैं कितना चिल्लाई थी । भैया मेरी गुड़िया की शादी में बाराती बन मेरी गुड़िया कानी हो गई मैं कितना चिल्लाई थी । भैया मेरी गुड़िया की शादी में बा...
गर यही हाल रहे, तो है, मुमकिन कलाई सुनी रह जायेगी, एक दिन गर यही हाल रहे, तो है, मुमकिन कलाई सुनी रह जायेगी, एक दिन
ये मानवीय संवेदनाओं को अनछुआ कर देने की आदत ये मानवीय संवेदनाओं को अनछुआ कर देने की आदत
पारिजात सी एक लड़की पर सात सुरों का सरगम लिखते, पारिजात सी एक लड़की पर सात सुरों का सरगम लिखते,
लड़ाई लड़ता अफ़ग़ानों के खिलाफ कई उन्हें पश्चिमी पंजाब की ओर भगाया था लड़ाई लड़ता अफ़ग़ानों के खिलाफ कई उन्हें पश्चिमी पंजाब की ओर भगाया था
दिन दोपहर में लाइट का जाना बरगद के पेड़ के नीचे बैठे हर एक मुंह से सुनी कहानी दिन दोपहर में लाइट का जाना बरगद के पेड़ के नीचे बैठे हर एक मुंह से सुनी कहानी
प्रेम गहन है...तो मजबूरी में प्रेम विरल है...तो मगरूरी में प्रेम गहन है...तो मजबूरी में प्रेम विरल है...तो मगरूरी में
दुनिया की भीड़ में खड़ा परिंदा ढूंढता अपनी परछाई को दुनिया की भीड़ में खड़ा परिंदा ढूंढता अपनी परछाई को