देश सबसे बड़ा होता है
देश सबसे बड़ा होता है
मैं जाति से अमुक
लेकिन मेरी जाति से बड़ा मेरा देश
मैं पंथ से अमुकपंथी
लेकिन मेरे पंथ से बड़ा मेरा देश
मैं धर्म से अमुक
लेकिन मेरे धर्म से बड़ा मेरा देश।
ये तीन यक्ष प्रश्न हैं।
इस देश में तमाम लोगों के लिए
उनका पंथ, जाति-धर्म है बड़ा उनके देश से
और यही है जड़ लड़ाई की ।
बड़े बुद्धिजीवी कहेंगे
देश तो बाद की चीज है
हम विश्व परिवार मानते हैं।
नहीं समझोगे
देशभक्ति का अर्थ ।
शायद तब तक नहीं
जब तक स्वतंत्र हो।
जब देश पर हमला होता है
अधिकार करने हेतु।
नागरिकों पर शोषण करने
बाहरी शक्ति आती है।
तब समझ आता है
देश और राष्ट्रवाद।
धर्म तब भी थे
जब हम सैकड़ों साल गुलाम थे।
धर्म तब भी थे
जब हमें हमारी ही धरा पर
स्वतंत्र हो जीने के नहीं अधिकार थे।
जातियां तब भी थीं
जब बहन बेटियों की मंडियां लगीं।
जातियां तब भी थीं
जब बेकसूरों को फांसियां मिलीं।
पंथ तब भी थे
जब किसी ने जूतों पर जीभ से पालिश करवाई।
पंथ तब भी थे
जब अपने ही खेत में फसल उपजाने की
अनुमति न मिल पाई।
कुछ लोगों ने
उस समय
ऊपर उठ
धर्म, जाति और पंथ से
आवाज़ उठाई।
शहादत दी
देश के लिए।
लहू बहाया,
यातनाएं सहीं,
पीड़ाएं झेलीं
क्रान्ति की ज्योति जलाई।
कड़कती ठंड में बर्फ की सिल्लियों पर जिस्म तुड़वाया।
कोड़े कोड़े पर अंगुल अंगुल चमड़ी को उधड़वाया।
चिता भस्म पर
अपनी लाशों की
खड़ा किया
एक स्वतंत्र देश।
जानते हो किसके लिए?
हमारे लिए!
कुछ लोगों ने
आजादी में
ज्यादा खा लिया
इसलिए
बुद्धि हो गई मोटी उनकी।
महत्व समझो
आजादी का
और समझो देशभक्ति का मूल्य।
सीधी सी बात यही
जब आती है देश पर
तो अपने देश के लिए
खुद लड़ना पड़ता है।
तुम सिर्फ हो एक बाजार
दूसरे देशों के लिए
अथवा हो धरती का एक टुकड़ा मात्र
जिस पर वे करना चाहते हैं अधिकार ।
यह सच का आईना है
जो इस आईने में एक बार झांककर
अपना मुंह देख लेता है।
उसके लिए
देश सबसे बड़ा होता है।
