देश के सपूत
देश के सपूत
सामने से हिम्मत नहीं दुश्मनों की
इसीलिए पीछे से कायर वार करते हैं
पलट जाते हैं
सत्य बातों से सब सामने ही
पीछे अफवाह हजार करते हैं
रत्न सिंह से पृथ्वीराज चौहान से लेकर
पुलवामा, गलवान घाटी आदि पर
असत्य मीठी वाणी से
वचन दे दोस्ती कर दगाबाजी करते हैं
इतिहास में नहीं जिनका साक्ष्य
आदि से अंत तक
वह यहाँ अपना अधिकार करते हैं
महफूज नहीं
अपने ही देश में अपने लोग
आत्यार देख कर भी
बन रहे हैं देश के दुश्मनों को अमीर
जो बात देश की गरीबी मिटाने की करते हैं
सोचा हैं क्यों लत हैं विदेशी सामान की
बात आत्मनिर्भर, स्वदेशी की करते हैं
बॉर्डर पर शहीद होते हैं निर्दोष जवान हमारे
बिखराव हैं हर तरफ
ये मेरे देशवासी सिर्फ अपने अपने
अधिकार के लिए एकता का भाव रखते हैं
इसी के चलते बाहर के दुश्मन लड़ाई करवा
उठा कर लाभ
हमारे देश पर आक्रमण हर बार करते हैं
उस हिंदुस्तान की रक्षा घर से दूर रहकर
हमारे देश के सपूत वीर जवान
अपनी जान कुर्बान कर करते हैं।
