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Riya yogi

Abstract

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Riya yogi

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देखो ये नारी कैसी है....

देखो ये नारी कैसी है....

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देखो ये नारी कैसी है

जाने कितने रुप निभाती है 

ममता दया करुणा की मूर्ति है 

घर को कैसे प्रेम से सजाती है 


देखो ये नारी कैसी है... 

जाने कितने रूप निभाती है

ये बेटी बनकर घर को महकाती है 

पापा की लाड़ली कहलाती है 

अपने घर का गौरव कहलाती है 


पापा का मान बढाती है, सम्मान बढाती है 

भाइयों पर सारा प्यार लुटाती है 

मर्यादाओ में बंधकर रीती रिवाजो को निभाती है 

अपना घर छोड़कर पराये घर को अपना बनाती है 


देखो ये नारी कैसी है 

जाने कितने रूप निभाती है 

संगिनी बन जीवन भर साथ निभाती है

एक बहु बनकर  घर को प्यार से सजाती है 

सब की डांट खाकर भी मुस्कुराती है 


लक्ष्मी बन कर घर का मान बढाती है 

देखो ये नारी कैसी है

जाने कितने रूप निभाती है।


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