STORYMIRROR

Riya yogi

Abstract

4  

Riya yogi

Abstract

देखो ये नारी कैसी है....

देखो ये नारी कैसी है....

1 min
209

देखो ये नारी कैसी है

जाने कितने रुप निभाती है 

ममता दया करुणा की मूर्ति है 

घर को कैसे प्रेम से सजाती है 


देखो ये नारी कैसी है... 

जाने कितने रूप निभाती है

ये बेटी बनकर घर को महकाती है 

पापा की लाड़ली कहलाती है 

अपने घर का गौरव कहलाती है 


पापा का मान बढाती है, सम्मान बढाती है 

भाइयों पर सारा प्यार लुटाती है 

मर्यादाओ में बंधकर रीती रिवाजो को निभाती है 

अपना घर छोड़कर पराये घर को अपना बनाती है 


देखो ये नारी कैसी है 

जाने कितने रूप निभाती है 

संगिनी बन जीवन भर साथ निभाती है

एक बहु बनकर  घर को प्यार से सजाती है 

सब की डांट खाकर भी मुस्कुराती है 


लक्ष्मी बन कर घर का मान बढाती है 

देखो ये नारी कैसी है

जाने कितने रूप निभाती है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract