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Kishan Negi

Abstract Classics Thriller

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Kishan Negi

Abstract Classics Thriller

डूबता हुआ सूरज

डूबता हुआ सूरज

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डूबते हुए सूरज को कोई नजर भर नहीं देखता 

उगते हुए सूरज को इधर सब सलाम करते हैं

बहुत मतलबी हो गई है बेदर्द दुनिया जनाब 

अपनों की मोहब्बत को अब सरेआम करते हैं 


अपना समझ कर तूने जिनको वक्त दिया था 

तुझे क्या पता आज वही तुझे बदनाम करते हैं 

खुद से ज्यादा भरोसा था तुझे जिन यारों पर 

मतलब निकलते ही अब तुझे बदनाम करते हैं


अपनी जिम्मेदारियां का बोझ तुझे सौंप कर

सुबह से शाम चादर तानकर आराम करते हैं 

दोस्त, फासले बनाए रखना मतलबी यारों से

रात रात जाग कर दूसरों की नींद हराम करते हैं


शिकायत करने के सिवा कुछ आता नहीं इनको 

यही लोग तुम्हारी हर कोशिश को नाकाम करते हैं

तुम्हारी ऊंचाइयां देखकर जलन होती है इनको 

मौका मिलते ही तुम्हारी इज्जत को नीलाम करते हैं 


उनकी दीवानगी पर आज हम भी फ़िदा हो गए 

सुना है कातिल नज़रों से ही कत्लेआम करते हैं

हमने कहा दुनिया से नजरें बचाकर कभी मिलो 

मुस्कुराकर बोली हम हर काम सरेआम करते हैं।


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