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chandraprabha kumar

Inspirational

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chandraprabha kumar

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डरावना क्या

डरावना क्या

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भय की परिभाषा अलग- अलग

जो किसी के लिये डरावना है,

वह किसी के लिये सुहावना है

सबकी अपनी अपनी समझ है। 


सुन्दर कल-कल बहती नदी

सुन्दर गर्जना करता जलनिधि,

किसको मनोहारी नहीं लगता

किसको आकर्षक नहीं लगता। 

 

किसी को पृथ्वी के आभूषण की

झंकार समुद्र का गर्जन लगता ,

किसी को उसकी उत्ताल तरंगें

 भयोत्पादक आभास देती हैं। 


किसी को नाव में बैठना

अच्छा लगता है,

पर कोई नाव में बैठते ही

भयभीत हो जाता है। 


पानी का अपार विस्तार

उसे डरावना लगता है,

डूब जाने का डर सताता है

नाव उलट जाने का भय होता है। 


कोई पानी में छप छप कर 

नहाता है मुदित मन,

कोई पानी में उतरते ही

डरता है, चिल्लाता है। 


आधी जमी हुई खेती से

भरी वसुधा वर्षा जल पाकर

उल्लसित हो उठती है

समय समय की बात है। 


असमय की वर्षा 

खेती तबाह कर देती है,

वही वर्षा जल कभी सुखद

 कभी भयप्रद हो जाता है। 


सबके अपने अपने भय हैं

सबकी अपनी अपनी ग्रन्थि,

पर यथार्थ ज्ञान की ऐसी शक्ति

वह भय दूर कर अभय देता है। 



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