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Kumar Vikash

Inspirational


4.6  

Kumar Vikash

Inspirational


चलता रहा निरन्तर

चलता रहा निरन्तर

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मैं कभी रूका नहीं चलता रहा निरन्तर ,

बहती नदिया की जल धार की तरह !


लहरें भी रूक जाती हैं कभी सुस्ताती हैं ,

लहरें भी रूक जाती है कभी सुस्ताती है !!


मैं कभी रूका नहीं चलता रहा निरन्तर ,

अनवरत गिरते पर्वत से झरने की तरह !


बारिश भी थम जाती है कभी सुस्ताती है ,

बारिश भी थम जाती है कभी सुस्ताती है !!


मैं कभी रूका नहीं चलता रहा निरन्तर ,

पुष्पों की फिजाओं में उड़ती खुशबू की तरह !


पवन भी थम जाती है कभी सुस्ताती है ,

पवन भी थम जाती है कभी सुस्ताती है !!


मैं कभी रूका नहीं चलता रहा निरन्तर !

रौशनी में साथ चलते एक साये की तरह ,


साँसें भी रूक जाती हैं कभी सुस्ताती हैं ,

साँसें भी रूक जाती हैं कभी सुस्ताती है !! 


मैं कभी रूका नहीं चलता रहा निरन्तर ,

गतिमान चलते समय के चक्र की तरह !


जिन्दगी भी रूक जाती है जब मौत आती है ,

जिन्दगी भी रूक जाती है जब मौत आती है !!


मैं कभी रूका नहीं चलता रहा निरन्तर !

जीत को मन में रख कर विजय की तरह ,


हार भी रूक जाती है कभी जीत में

बदल जाती है,

हार भी रूक जाती है कभी जीत में

बदल जाती है !!


मैं कभी रूका नहीं चलता रहा निरन्तर ,

मंज़िल की तलाश में पथिक की तरह !


मैं कभी रूका नहीं चलता रहा निरन्तर ,

मैं कभी रूका नहीं चलता रहा निरन्तर !!


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