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Bhawana Raizada

Abstract

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Bhawana Raizada

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चलो

चलो

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चलो तुमको ले कर चलते हैं,

उस जहाँ में जब न होते थे ये,

मोबाइल, इंटरनैट, फोन, मीडिया,

फिर भी मिलते थे दिल एक दूसरे से।


चलो तुमको ले कर चलते हैं,

उस जहाँ में जब न होते थे ये,

बिजली,चमकती रौशनी , पंखे, ऐसी,

फिर भी पेड़ देते थे ठंडी हवा।


चलो तुमको ले कर चलते हैं,

उस जहाँ में जब न होते थे ये,

बड़ी बड़ी इमारतें, आलीशान मकान और होटल,

फिर भी सब मिलजुल कर रहते थे।


चलो तुमको ले कर चलते हैं,

उस जहाँ में जब न होते थे ये,

रंगबिरंगें कपड़े, डिज़ाइनर परिधान,

फिर भी सब सादा जीवन बिताते थे।



चलो तुमको ले कर चलते हैं,

उस जहाँ में जब न होते थे ये,

पार्टियां,क्लब,किटी और रेन डान्स,

फिर भी सब आपस में हँसते बोलते थे।


चलो तुमको ले कर चलते हैं,

उस जहाँ में जब न होते थे ये,

पिज़्ज़ा, बर्गर,फास्टफूड और मैगी,

फिर भी एक ही थाली में सब मिलकर खाते थे।


चलो तुमको ले कर चलते हैं,

उस जहाँ में जब न होते थे ये,

आरामदायक गद्दे,तकिये और चादरें,

फिर भी सब चैन की नींद लेते थे।


चलो तुमको ले कर चलते हैं,

उस जहाँ में जब न होते थे ये,

छल, कपट, चोरी, बलात्कार और भ्रष्टाचार,

फिर भी सब दूसरे की मदद को तैयार थे।


चलो तुमको ले कर चलते हैं,

उस जहाँ में जब न होते थे ये,

अनाथाश्रम, विधवा घर और वृद्धाश्रम,

फिर भी सब एक साथ परिवार में रहते थे।



चलो तुमको ले कर चलते हैं।



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