चित्रकार
चित्रकार
चित्रकार अपनी तूलिका से गढ़ता है चित्र
बिखरी थी कल्पनाओं में जो तस्वीरें अनगिनत
सिर्फ़ रेखाओं से देखो कैसा चमत्कार है किया
अद्भुत कलाकृति को सजीव सा बना दिया
सुंदर झख सफ़ेद पक्षी को देखो
प्रकृति के सुंदर परिवेश से सीखो
निर्मल बहती हुई सुगंधित पवन
मोहित कर रही है हर्षित हुआ मन
वृक्ष भी झूम रहे हैं खुशी से
प्रसन्नता व्यक्त कर रहें हो जैसे
सौंदर्य की देवी भी पुलकित है मानो
कुदरत बनी है सखी उसकी मन तरंगायित जानो।
