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MD ASHIQUE

Abstract

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MD ASHIQUE

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छठी मैया

छठी मैया

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आह! ये गीत कैसी एक

राहत सुकून असीम गदगद

अबोध विश्रांत रोमांचक। 


मधु उषा की लाली में मन तन कण

स्नान डूब भर कर शीतल करती है

हिम अरुण प्राची किशोर कमल।


हां इसी घाट पर विकल मन

बांध बांध जाती है यह विभोर गीत

कोई खोई गुमनाम अचेतन बाल मन।। 


      


 



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