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SNEHA NALAWADE

Abstract

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SNEHA NALAWADE

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छठा दिन

छठा दिन

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प्रिय डायरी,

छठा दिन छठा दिन

आज मैं रोज के हिसाब से उठ गई।

आज हमने पापड़ बनाए

सुबह उठकर काफी तकलीफ दायक था करना

पर अंत में बन गए,

दोपहर में हमने मस्त मूवी देखी

पहली बार मैने देखा बहुत पसंद आई मुझे

बाकी दिन भर रोज का ही काम चलता रहा।

वैसा आज खाना नहीं बनाया

दोपहर में खाना बनाया था,

तो ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं थी

दिन भर ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं थी

सब कुछ अच्छे से हुआ।


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