Shilpa Sekhar
Action
मां की गोदी में सर रखकर,आराम से मुझको सोना है,मुझे फिर से छोटी बनना है।
छोटी बनना है
क्यों है?
नेक इरादा
धुम्रपान
हंसी
साथ रहो
हम साथ साथ है...
अलग
धरती पर भगवान
सेहत बनाओ!
हाँ ! मजदूर हैं हम ।साहब ! दर- दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं हम। हाँ ! मजदूर हैं हम ।साहब ! दर- दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं हम।
आतंकी का खौफ बताओं, कब तक राज करेगा अब घाव लगे हैं जो हृदय पर, उनको कौन भरेगा अब बतलाओ क्या उत्तर ... आतंकी का खौफ बताओं, कब तक राज करेगा अब घाव लगे हैं जो हृदय पर, उनको कौन भरेगा अ...
एक एक कर मेघनाद ने शस्त्र अनेकों मार दिए मेघनाद ने हनुमान पर जाने कितने ही वार किए एक एक कर मेघनाद ने शस्त्र अनेकों मार दिए मेघनाद ने हनुमान पर जाने कितने ही वा...
कितने कवि लेखक चले गये अब, साहित्य जगत में अकेला ही छोड़। कितने कवि लेखक चले गये अब, साहित्य जगत में अकेला ही छोड़।
मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है। मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है।
उन सपनों को अब जीना चाहती हूँ तुम्हारे घर में एक छोटा सा कोना चाहती हूँ उन सपनों को अब जीना चाहती हूँ तुम्हारे घर में एक छोटा सा कोना चाहती हूँ
अब ऑनलाइन भी लड़कियों के लिए नए नियम बना रहे हैं। अब ऑनलाइन भी लड़कियों के लिए नए नियम बना रहे हैं।
अंजान है मन उन सारे प्रयासों से जो हर पल सिर्फ एक ही ओर नज़र बनाएं रखता है, अंजान है मन उन सारे प्रयासों से जो हर पल सिर्फ एक ही ओर नज़र बनाएं रखता है,
माँ भारती की सीमा-औ-सम्मान-सुरक्षा पर, ये सदैव शीश अर्पण को तत्पर। माँ भारती की सीमा-औ-सम्मान-सुरक्षा पर, ये सदैव शीश अर्पण को तत्पर।
बीत जाते है शादी के ये चार दिन नेग चार, बन्ना बन्नी में बीत जाते है शादी के ये चार दिन नेग चार, बन्ना बन्नी में
सरहद चाहे देशों के बीच हो या दिलों के बीच, इंसान की ही बनाई हुई होती हैं। सरहदों का मतलब और मकसद ही ... सरहद चाहे देशों के बीच हो या दिलों के बीच, इंसान की ही बनाई हुई होती हैं। सरहदों...
जब मैं समाज में बैठूँ तो बगल वाला पास से उठ जाता है। मंदिर में मेरा जाना जैसे अछूत ही जब मैं समाज में बैठूँ तो बगल वाला पास से उठ जाता है। मंदिर में मेरा जाना जैसे...
चुप – चुप अम्मा मेरी रहती है लगता की सबसे वो रूठी है चुप – चुप अम्मा मेरी रहती है लगता की सबसे वो रूठी है
कौन कहता है कि गुलशन की जमीं उर्वर नहीं, कौन कहता है कि मेरा ये वतन कमजोर है। कौन कहता है कि गुलशन की जमीं उर्वर नहीं, कौन कहता है कि मेरा ये वतन कमजोर है।
नौजवानों इस वतन का कल है हाथों में तुम्हारे। नौजवानों इस वतन का कल है हाथों में तुम्हारे।
मजहब से उनका काम नहीं, बस झूठी शान का तर्ज़ है ये मजहब से उनका काम नहीं, बस झूठी शान का तर्ज़ है ये
रणभूमि में आज, मचा गया भूचाल। रणभूमि में आज, मचा गया भूचाल।
अपनों की चिंता छोड़कर वो तो बचाते कितनों की जान, अपनों की चिंता छोड़कर वो तो बचाते कितनों की जान,
जब मैं घर से निकल कर आया, भारत माता की सौगंध भी तो खाया जब मैं घर से निकल कर आया, भारत माता की सौगंध भी तो खाया
पापा-मम्मी के साथ दिवाली मनाई। और रेलगाड़ी की मौज मनाई। पापा-मम्मी के साथ दिवाली मनाई। और रेलगाड़ी की मौज मनाई।