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शाह फैसल सुखनवर

Abstract

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शाह फैसल सुखनवर

Abstract

चेहरे के पीछे चेहरा है

चेहरे के पीछे चेहरा है

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वो राज़ बहुत ही गहरा है

चेहरे के पीछे चेहरा है।


आंखें उसकी काली काली

बालों का रंग सुनहरा है।


हुस्न कयामत है उसका

जो देखे वो ही ठहरा है।


दीदार की दी है छूट मुझे

मिलने पे लगाया पहरा है।


सुनता बातें वो मेरी नहीं

क्या दिलबर मेरा बहरा है।


चालों की इस दुनिया में क्या

 फैसल भी इक मोहरा है



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