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Sudhir Srivastava

Abstract

3  

Sudhir Srivastava

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चौपाई

चौपाई

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चौपाई ******* उसने शीश हाथ जब फेरा। मुखमंडल मुस्कान बिखेरा।। छोटी को इससे क्या लेना। माँ बन खिला रही जब छेना।। आओ मिलकर शोर मचाएं। हंँसे हँसाएँ और रुलाएँ।। नव जीवन सौगातें बाँटें। भूल ही जाएँ चुभते काँटे।। इतना तो नादान नहीं हो। वही गलत या आप सही हो।। व्यर्थ नहीं तकरार कीजिए। स्वागत कर सम्मान दीजिए।। ममता देती माँ के जैसी। जब-तब बिल्कुल दिखती वैसी।। फिर भी भूल नहीं तुम जाना। हिटलर लगते उसके नाना।। सुधीर श्रीवास्तव 


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