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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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चौपाई -आस

चौपाई -आस

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चौपाई - आस इक रोटी की आस लगाई। राह ईश ने उसे दिखाई।। तड़प भूख की रुला रही है। मुख पर बड़ी वेदना भी है।। लिए एक उम्मीद मैं आई। भूख हमें है विवश कराई।। तुम हमको दुत्कार न देना। जीवन नैया द्वय की खेना।। नहीं माँगती धन दौलत वो। भूख पेट से व्याकुल है वो।। नहीं तोड़िए उसकी आशा। दूर करो बस आप निराशा।। तेरे द्वारे वो है आई । वो भी तो इक माँ है भाई।। आँसू जैसे पिए हुए है। मन में ढेरों आस लिए है।। ******* चौपाई - जग  समझो जग की माया भाई। सुख-दुख की सब यहां मिठाई।। जिसने जग को जान लिया है। नव जीवन पहचान दिया है।। यह जग सारा बड़ा निराला। मुखड़ा उजला दिल है काला।। आओ इसमें हम रम जाएं। राजनीति में नाम कमाएं।। इस जग का इतिहास पुराना। रहे बताते दादा नाना।। हमको अपना फर्ज निभाना। जग के सुंदर गीत सुनाना।। ******* चौपाई - गुणसागर ******* खुद को मत कहिए गुणसागर। भेद नहीं तुम करो उजागर।। अपनी छवि मत आप गिराओ। मूर्ख नहीं बन काम बनाओ।। जितने भी दिखते गुण सागर। कभी भरी नहिं उनकी गागर।। लिए घड़ा वे घूम रहे हैं। मुँह काला वे आप किए हैं।। सुधीर श्रीवास्तव  


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