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Sudhir Srivastava

Abstract

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यमराज का ट्रंप को श्राप

यमराज का ट्रंप को श्राप

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यमराज का ट्रंप को श्राप ******* वेनेज़ुएला पर अमेरिकी हमले  और वहाँ के राष्ट्रपति को पत्नी के साथ  अलोकतांत्रिक ढंग से अपराधियों की तरह  बलपूर्वक बंधक बनाकर अमेरिका लाने की  खबर  आने के बाद मित्र यमराज को बड़ा गुस्सा आया। बिना सोचे विचारे वो सीधे व्हाट्स हाउस  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास पहुंच गया, जो मुँह में आया-जमकर सुनाया, फिर धमकाया  ट्रंप तेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। शान्ति का नोबेल पुरस्कार भी चाहने की छटपटाहट में  तू सारे अलोकतांत्रिक काम करता है। कहने को तो तू शाँति का मसीहा बनता है  पर दुनिया जानती है, कि तू हर ओर युद्ध ही चाहता है। अपने हथियारों का बड़ा बाजार बनाये रखने की जुगत में  दुनिया के अलग-अलग देशों को  आपस में लड़ाते रखना चाहता है। दूसरे देशों में अपरोक्ष अतिक्रमण की आड़ में  सबसे बड़ा लंबरदार बनने की चाह में  तेल, गैस, खनिज, स्वर्ण भंडार पर एकाधिकार चाहता है। दोहरे मापदंड अपनाकर खुद को महान बताता है, समूचे विश्व का नायक बनना चाहता है, अपना व्यवसाय चमकाना  बेटे को स्थापित करना चाहता है। पर तेरा ये सपना कभी पूरा नहीं होगा, अब मैं यमराज! आज तुझे श्राप देता हूँ, क्योंकि तू अपने देश और नागरिकों से भी  विश्वासघात के नित नए आयाम गढ़ता है। आखिर तू खुद को क्या समझता है? लगता है कि तू एकदम पागल हो गया है, तू लाख कोशिश कर ले, चाहे जितना हाथ पाँव मार ले, खुद को खुदा ही क्यों न समझ ले, तू निश्चित ही हारेगा और एक दिन सिर पकड़ कर रोयेगा, अपने अधर्म -कर्म के  लिए पछताएगा  अपनी सोच पर रोएगा, आंसू बहाएगा। आखिर तू भी तो महज एक इंसान हैं आज़ अमेरिका का राष्ट्रपति है, हमेशा तो नहीं रहेगा, तब तू खौलते दूध में आये उबाल बाद  शांत हो जाने की तरह जल्दी ही बैठ जायेगा, तब विश्व ही नहीं तेरा देश भी तुझे भाव नहीं देगा, क्योंकि तू तो क्या हर कोई मेरे कोप से डरेगा। वैसे भी सत्ता का घमंड एक दिन उतर ही जायेगा  जब तेरा कार्यकाल पूरा हो जाएगा, और तेरे नोबल पुरस्कार का पाने सपना  दिवास्वप्न बनकर रह जायेगा, क्योंकि यह यमराज का श्राप है  जो कभी खाली भी नहीं जायेगा। और जो मुझे उकसाएगा  वो एक जन्म ही नहीं दो-चार जन्मों तक पछताएगा, पर मेरा वो कुछ बिगाड़ नहीं पायेगा, तू भी एक कोशिश करना चाहे, तो जरूर कर ले क्या पता तेरा जलवा यमलोक में भी बढ़ जाए, और तू मेरे श्राप का तोड़ निकाल ले जाए। सुधीर श्रीवास्तव  


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