STORYMIRROR

Shelley Khatri

Romance

3  

Shelley Khatri

Romance

चांदनी बनकर...

चांदनी बनकर...

1 min
215

शाम ढले जब

चांदनी छाती है

हौले हौले

ठीक वैसे ही

धीरे से जादू बिखेरती

आना तुम

मेरे दिल में

चांदनी की आभा की तरह

छा जाना मुझ पर

रंग देना मुझे

अपने ही रंग में

प्रत्युष वेला में

छुपने लगे जब

चांदनी

तुम चुपचाप

समा जाना मुझ में

हर रात बिखेरना

फिर वही जादू

फिर छाना

मुझ पर

चांदनी बनकर...


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance