STORYMIRROR

Padamnave Parashar

Abstract Inspirational

3  

Padamnave Parashar

Abstract Inspirational

चाँद अब तुम आम हो जाओ

चाँद अब तुम आम हो जाओ

1 min
202


चाँद अब तुम आम हो जाओ 

प्रणय वीथिका से निकलो 

मजलूमों की झोंपड़ी में 

उतर आओ...


तुम रोशनी के पहरेदार 

सितारों की सैना के साथ मुस्तैद 

फिर भी अंधेरे की सेंधमारी

भूल सुधारो काम पर लग जाओ...


चांदनी को कर दो हिदायत विरह के गीत गाये

तप्त कामना की सेवा छोड़ो

थके हारे मजदूरी मन को अब 

जल्द से जल्द राहत की सांस दिलाओ...


उपमेय और उपमानों से बाहर निकलो 

ठोस ज़मीन पर आओ

सात आसमानों

शशिशेखरों को छोड़ो 

यथाशीघ्र चन्द्रमा 

मनसोजातः हो जाओ..



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract