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Garima Mishra

Abstract

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Garima Mishra

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चाहत राधा सी

चाहत राधा सी

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तुम रखना चाहत राधा सी

मैं कान्हा बनकर आऊँगा!!


अंधकार में जब तुम होंगी

मैं जुगनू बन छा जाऊँगा


धूप तपा देगी जब राह को

मैं शीतल जल बन बह जाऊँगा


विपरीत लगे जब तुम्हें परिस्थिति

मैं तुम को राह दिखाऊँगा


तुम रखना चाहत राधा सी

मैं कान्हा बनकर आऊँगा!!


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