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GUDDU MUNERI "Sikandrabadi"

Abstract

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GUDDU MUNERI "Sikandrabadi"

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बुढ़ापे की सनक

बुढ़ापे की सनक

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ये बुढ़ढ़ा जवान हो गया,  

बुढ़ढ़ा दिल लेके फरार हो गया।

गली गली मे शोर है, 

डांस मे इसके जोर है ,

चाल ढाल मे बिल्कुल मस्त ,

बुढ़ापे में जवानी का कमाल हो गया ।


ये बुढ़ढ़ा जवान हो गया  

बुढ़ढ़ा दिल लेके फरार हो गया।

अजी पकड़ो-पकड़ो,

बुढ़ढ़ा दिल लेके फरार हो गया ।


हाथ-पैर मारे ,

लम्बी लम्बी टाँगे,

सफेद है दाढ़ी ,

सफेद है सर के बाल ,

मस्ती मे देखो ये चूर हैं।


ना कोई थकावट 

ना कोई सजावट 

गली मोहल्ले मे सबसे 

दो चार हो गया,

लगता है बुढ़ढ़ा जवान हो गया 

बुढ़ढ़ा दिल लेके फरार हो गया।


ना सुने किसी की 

बस कहता है अपनी ,

जबान पे ना लगाम है कोई ,

हटने को तैय्यार न है कोई, 

अल्फाजों कीबहस में

तीर-ओ-कमान हो गया ।

ये बुढ़ढ़ा जवान हो गया  

बुढ़ढ़ा दिल लेके फरार हो गया।


गली गली मे शोर है ,

डांस मे इसके जोर है ,

चाल ढाल मे बिल्कुल मस्त, 

बुढापे मे जवानी का कमाल हो गया ।

ये बुढ़ढ़ा जवान हो गया।  

बुढ़ढ़ा दिल लेके फरार हो गया ।



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