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आ. वि. कामिरे

Abstract

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आ. वि. कामिरे

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बुरा

बुरा

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कौन कहता है 

बुराई दिल मे होती है

अगर ऐसा होता

तो कमबख़्त सच कहता हूँ 

हमेशा इन्सान ही शैतान कहलाता

पर जरा नजर घुमा के देख तो सही

बुराई इन्सान के दिल मे नही

तो उसकी सोच मे होती है...!!



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