बुजुर्गों की अहमियत
बुजुर्गों की अहमियत
बुजुर्गों की अहमियत को तो समझो मेरे यार,
करोगे जब उनकी सेवा तभी मिलेगा प्यार।
ईश्वर भी प्रसन्न होते तभी जब हो उनका सत्कार,
यदि करोगे परेशान उनको तो मिलेगी फटकार।
इनसे ना अपना पिंड छुड़ाओ ये ही हैं ब्रह्मज्ञान,
जाते हुए भी दे जाते अपने आशीष का वरदान।
इनका साथ हो तो ऐसे जैसे ईश्वर के हैं पास,
इनको प्रसन्न रखें तो हो जाएं ईश्वर के खास।
बालक समान स्वभाव इनका बालक ही कहलाते हैं,
बालक सा आचरण इनका बालक सा मन बहलाते हैं।
शीघ्र क्रोध आ जाता इनको धैर्य से कार्य करना होगा,
तपस्या बड़ी है इनकी करना उसी में हमें जलना होगा।
शनै शनै गति है इनकी इनके साथ ही बढ़ना होगा,
मुश्किलें आएं अगर सेवा में उससे भी लड़ना होगा।
बुजुर्गों को जिसने समझा उनका जीवन हुआ सफल है,
जिसने उनको ठुकरा दिया उनका तो हुआ ही विफल है।
बुजुर्गों से ही तो घर की और हमारी पहचान है,
हम सब ही करते इनका हर समय सम्मान हैं।
बच्चों से ही बढ़ा ये तो स्नेह लगाते रहते हैं,
शिक्षा और संस्कारों का दीप जलाते रहते हैं।
इनकी भी इच्छा होती है इनसे हम सब बात करें,
कुछ पल बैठ इनके साथ इनका ज्ञान प्राप्त करें।
इनके किस्से और अनुभव बहुत ही प्यारे होते हैं,
उठो - बैठो इनके संग ये तो बहुत ही न्यारे होते हैं।
इनका हाथ अगर हो सिर पर सबको हम भाते हैं,
इनकी प्रसन्नता ही हमको तीर्थों के दर्शन कराते हैं।
जो बुजुर्गों से अपने दूर हो जाते या कर आते हैं,
ईश्वर भी उनसे रुष्ट हो उन्हें अपयश कर जाते हैं।
कैसी भी स्थिति हो उनकी उन्हें छोड़ ना जाना तुम,
तुम्हारे सहारे हैं पृथ्वी पर उन्हें दुख ना पहुंचाना तुम।
सबकी स्थिति भी आगे यही आनी है,
यही अटल सत्य है ये तो जानी मानी है।
बुजुर्गियत से ना कभी बचा हर कोई है,
समझ लो इस दर्द को सहा हर कोई है।
बुजुर्ग ही हमारे घर की आन बान और शान हैं,
इन्हीं में छिपे ज्ञान का करते हम सब गुणगान हैं।
इनकी बुद्धि और परिपक्वता की ही मिसाल है,
इनके आगे तो हम सब की भी क्या बिसात है।
बुजुर्गों की अहमियत को तो समझो मेरे यार,
करोगे जब उनकी सेवा तभी मिलेगा प्यार।
