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Dr Lalit Upadhyaya

Abstract

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Dr Lalit Upadhyaya

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बुढापा

बुढापा

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जवानी में थे ऐसे कड़क,

रुतबेदार थी हमारी खनक

अब बुढ़ापे में जा रही चमक,

बढ़ गई है बुढ़ापे की सनक

अब दाल रोटी अच्छी नहीं लगती

डाइबिटीज के कारण चाय फीकी ही चलती

कम रोशनी से आँखे भी कम देखती

ज्यादा चलने पर हर नस दुःखती।


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