Dr Lalit Upadhyaya
Abstract
जवानी में थे ऐसे कड़क,
रुतबेदार थी हमारी खनक
अब बुढ़ापे में जा रही चमक,
बढ़ गई है बुढ़ापे की सनक
अब दाल रोटी अच्छी नहीं लगती
डाइबिटीज के कारण चाय फीकी ही चलती
कम रोशनी से आँखे भी कम देखती
ज्यादा चलने पर हर नस दुःखती।
कल्याणी है ना...
प्रकृति का मं...
उत्तर प्रदेश ...
वोट है जरूरी
ऊंट किस करवट ...
खेला होवे ?
चलें प्रकृति ...
माँ का आशीर्व...
घर में बीते ब...
क्या कहूँ?
जैन धर्मी अनुयायी करे जैन धर्म चिंतन, हर्षोल्हास से मनाकर पर्युषण पर्व, दस धर्म दस द जैन धर्मी अनुयायी करे जैन धर्म चिंतन, हर्षोल्हास से मनाकर पर्युषण पर्व, दस ...
है पूजा मैथिली ने और सुमन से सजाया, है हिन्दी के भवन में, दुर्गा तेरा उजाला। है पूजा मैथिली ने और सुमन से सजाया, है हिन्दी के भवन में, दुर्गा तेरा उजाला।
चॉक्लेट चूरन तेल साबुन खबरों वाले अब अख़बार नहीं होते। चॉक्लेट चूरन तेल साबुन खबरों वाले अब अख़बार नहीं होते।
इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई। इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई।
अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्रियां ? अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्र...
हर दिल में होती है एक ख्वाबों खयालों की दुनिया । हर दिल में होती है एक ख्वाबों खयालों की दुनिया ।
जीवन के बाद शायद परीक्षाओं का अंत हो, हर मौसम लगे जैसे बसंत हो। जीवन के बाद शायद परीक्षाओं का अंत हो, हर मौसम लगे जैसे बसंत हो।
पल- पल बढ़ते कदमों से, पल पल बदल जाती है। पल- पल बढ़ते कदमों से, पल पल बदल जाती है।
आज्ञा पाकर शिव शंकर से सती पिता के घर तो आ गई। किंतु पिता के मुख से पति का अपमान सती स आज्ञा पाकर शिव शंकर से सती पिता के घर तो आ गई। किंतु पिता के मुख से पति का अप...
रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी पीठ थपथपाया रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी ...
इस भौतिक संसार में, धन का बहुत महत्व। इस भौतिक संसार में, धन का बहुत महत्व।
ज़िंदगी कब सरल थी हुई, कब मैं इतनी विरल थी हुई ज़िंदगी कब सरल थी हुई, कब मैं इतनी विरल थी हुई
पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो। पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो।
दे जाती है मुझे शब्द और मेरी कल्पना का अविरल रूप बन जाती है। दे जाती है मुझे शब्द और मेरी कल्पना का अविरल रूप बन जाती है।
आधी शक्ति युग दुनिया की अर्ध नारीश्वर का ब्रह्माण्ड। आधी शक्ति युग दुनिया की अर्ध नारीश्वर का ब्रह्माण्ड।
पल-पल रखते उनका ध्यान, एक दूजे पर छिड़के जान।। पल-पल रखते उनका ध्यान, एक दूजे पर छिड़के जान।।
कौन नहीं वाचाल है, क्यों मुझ पर आरोप। शब्दों का भंडार है, किससे कम यह तोप।। कौन नहीं वाचाल है, क्यों मुझ पर आरोप। शब्दों का भंडार है, किससे कम यह तोप।।
दिल तो देता है दलीलें हमें समझाता है, दर्द भीतर से निचुड़ने से मना करता है। दिल तो देता है दलीलें हमें समझाता है, दर्द भीतर से निचुड़ने से मना करता है।
जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया । जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया ।
माँ, तेरे आँचल का वो पहला एहसास याद है। माँ, तेरे आँचल का वो पहला एहसास याद है।