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Vinay Panda

Romance

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Vinay Panda

Romance

बसंत

बसंत

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तुम बसंत मेरे

मैं हूँ महक तेरी,

तुझमें बहूं और रहूँ मैं तुझमें

तुम मेरे मौसम मैं ऋतु हूँ तेरी..!


तुम बसंत मेरे ..

मैं मुरझायी-सी कली हूँ

टूटकर तुम मुझे बिखरने ना देना

बिना तेरे मैं पतझड़ परायी हूँ..!


तुम बसंत मेरे हो...!



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