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savitri garg

Abstract

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savitri garg

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बसंत की बहार

बसंत की बहार

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 कलियों ने मुस्कुराया, भौरों ने गुनगुनाया ,तो फूलों ने दिल को सहलाया।

लगता है कि बसंत बहार का मौसम आया।

पेड़ों में पतझड़ का मौसम आया,

तो नई -नई पत्तियों की पंखुड़ियों ने खिलखिलाया।

लगता है कि बसंत बहार का मौसम आया।।

प्यार करने का मौसम आया, इस मौसम ने दिल को धड़काया।

लगता है कि बसंत बहार का मौसम आया।।



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