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Vaibhav Gupta

Romance

5.0  

Vaibhav Gupta

Romance

बस तुम्हें पता ना चले

बस तुम्हें पता ना चले

1 min
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बस तुम्हें पता ना चले

कब तुम्हारे करीब आ जाऊँ।।

तुम्हें अपने बांहों में भरकर इस कदर सिमट जाऊँ

तुम्हारे उन सारे गुस्से को इक पल में निगल जाऊँ।।


बस तुम्हें पता ना चले

कब तुम्हारे करीब आ जाऊँ।।

तुम्हारी नादानियाँ समझ के इसे मैं भूल जाऊँ

धीरे से आके तुम्हारे सारे जज़्बात जगा जाऊँ।।


बस तुम्हें पता ना चले

कब तुम्हारे करीब आ जाऊँ।।

उन हर दर्द को तुम्हारे, ख़ूबसूरत पल में बुन जाऊँ

अपने प्यार से मैं, तुम्हारी तनहाइयाँ भुला जाऊँ।।


बस तुम्हें पता ना चले

कब तुम्हारे करीब आ जाऊँ।।

सारे रंजिश को भूल प्यार का गोता लगा जाऊँ

तुम्हारे गले के चुम्बन से उतरकर वो महफ़िल बना जाऊँ।।

बस तुम्हें पता ना चले

कब तुम्हारे करीब आ जाऊँ।।


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