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Devendraa Kumar mishra

Comedy

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Devendraa Kumar mishra

Comedy

बर्बादी फिर भी शादी

बर्बादी फिर भी शादी

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लड़ी आंख से आंख तो इंफेक्शन हो गया 

मिले दिल से दिल तो घर से बेघर हो गया 

प्रेमिका बोली - बिना घर के कैसी शादी 

कैसी होगी खाना आबादी, पहले मकान खरीदो 

जिसे मैं घर बनाकर तुमसे रूठूंगी, लडूंगी 

अपनी माँगों के लिए सुबह शाम तुम्हें परेशान करूंगी 

मैंने कहा - सरकार बना रही हो या घर बसा रही हो 

हम दो जिस्म एक जान होंगे या संसद में पक्ष और विपक्ष होगे 


वो बोली - जब तक प्रेम है, तब तक हम एक हैं 

जब शादी होगी तो संसद होगा 

पक्ष विपक्ष होगा 

माँगों के लिए अनशन होगा 

प्रदर्शन और तोड़ फोड़ होगा 

समर्थन वापिसी पर मेरा वापिस जाना मायके होगा 


मैंने कहा-ऐसी शादी का क्या फायदा 

विवाह में ऐसा कायदा, संसद भंग हो जाएगी 

वो बोली - सरकार गिर जाएगी तो फिर बन जाएगी 

घर गिरा तो तलाक, हर्जा खर्चा 498 ए 

जेल में चक्की पीसिंग एंड पीसिंग

मैंने कहा-भाड़ में जाए ऐसी शादी 

मैं प्रेम में ही हूँ राजी 


बाग में, बगीचे में, सिनेमा हाल में, रेस्तरां में मिल लेंगे 

वो बोली - फिर खानदान के साथ पुलिस और

संस्कृति के ठेकेदार हड्डी पसली तोड़ देंगे 

अच्छा खासा मज़ाक बनाकर छोड़ देंगे 

शादी ही हल है, शादी ही कल है, शादी ही आज है 

मैंने कहा - पर शादी में तो बड़ी कांव कांव है

उसने कहा - तुम कौआ बनकर रहना 


मैं मैना बनके रहूंगी 

यही शादी की सफलता का राज है 

तुम कुत्ता बन जाना, मैं धुत्कारूंगी 

तो चले जाना, मैं पुचकारूंगी तो दुम हिलाते आ जाना 

यही शादी की मस्ती है 

मैंने कहा - मैं समझ गया 


पति माने कौआ, पति माने कुत्ता 

जो कहीं नहीं झुकता, वो पत्नी के कदमों में झुकता 

वो बोली - हम शादी करके तुम्हें फालतू से पालतू बनाएंगे 

जानवर से इंसान बनाएंगे, आवारा से घरेलू बनाएंगे 


तुम वो साँप जिसके दांत तोड़कर पिटारे में बंद करके अपनी बीन पर नचायेंगे 

बन्दर गुलाटी खाना होगा तुम्हें मेरे इशारे पर 

हम मदारी का खेल दिखाएंगे 

हमने कहा-ये तो सजा है, कैद खाना है, गुलामी है 

वो बोली - यही तो शादी है 

शादी शक्कर है, खाते रहो जब तक 

डायबिटीज न हो जब तक।


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