STORYMIRROR

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Abstract Inspirational

3  

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Abstract Inspirational

बलिदानों का राही

बलिदानों का राही

1 min
211

कलम का सिपाही,

बलिदानों का राही,

पुल्कित होता प्राणों से,

त्वरा का अनुगामी।


दुर्गम पथ का साथी,

कलम का सिपाही,

छांव धूंडता उजियारे में,

अमर होती प्रथायें,


पाषाण तोड़ती हवायें,

कुदाल नहीं चलाता,

कलम का सिपाही।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract